संपादक- महेश सिंह
रिपोर्टर- उत्सव तोमर
राष्ट्रीय लोकदल, हरिद्वार द्वारा माननीय स्वर्ग चौधरी चरणसिंह जी (पूर्व प्रधानमंत्री भारत सरकार) की 120 वी जयंती पर इंद्रलोक सामुदायिक केन्द्र में यज्ञ कर उन्हे पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया।
राष्ट्रीय लोकदल, हरिद्वार द्वारा माननीय स्वर्ग चौधरी चरणसिंह जी (पूर्व प्रधानमंत्री, भारत सरकार) की 120 वी जयंती पर इंद्रलोक सामुदायिक केन्द्र,हरिद्वार में यज्ञ कर उन्हे पुष्पांजलि अर्पित कर याद किया।
प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी देवपाल सिंह राठी ने कहा कि चौधरी चरणसिंह कोई व्यक्ति नहीं थे! चौधरी चरणसिंह कोई राजनेता नहीं थे! चौधरी चरणसिंह कोई मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नहीं थे बल्कि वो किसान-कमेरे वर्ग की एक विचारधारा थे। जब भी इस देश मे किसानों की बात होगी तो चौधरी चरणसिंह भारत में युगों युगों तक याद किया जाएगा।
चौधरी चरणसिंह जी का जन्म 23 दिसम्बर, 1902, नूरपुर, यूनाइटेड प्रोविंस, ब्रिटिश इंडिया में पैदा हुआ। यह महान कृषि दार्शनिक एक दिन दिल्ली के तख्त पर बैठ जाएगा यह किसी ने नहीं सोचा था! चौधरी चरणसिंह 1857 की किसान क्रांति के मुख्य किरदार रहे राजा नाहर सिंह के परिवार से तालुक रखते है।अंग्रेजों से आजादी की ऐसी धुन सवार हुई कि गरीब किसान परिवार में पैदा हो कर भी परिवार के बजाय देश को सर्वोपरि रखा और महात्मा गांधी जी के सविनय अवज्ञा आंदोलन से प्रभावित हो उसमे शामिल हो गए व कभी पीछे मुड़कर नही देखा।1942 की अगस्त क्रांति तक एक देशभक्त क्रांतिकारी के रूप में लड़ते रहे और कई बार जेल गए एक बार तो अंग्रेज अधिकारीयो द्वारा उन्हे गोली मारने के आदेश भी हो गए थे। उन्होंने जीवन भर किसानों, मजदूरों, बुनकरों के लिए संघर्ष किया ,उनकी मृत्यु 29 मई 1987 में नई दिल्ली में हुई जहा उनका अन्तिम संस्कार किया गया आज वो किसान घाट के नाम से जाना जाता है।
इंद्रलोक आवासीय कल्याण समिति के अध्यक्ष जोबिंदर पाल आर्य जी ने कहा कि आजादी के तुरंत बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और जीवन पर्यंत जिस किसान परिवार से तालुक रखते थे उन किसान कमेरो के लिए आजीवन लड़ते रहे। जब वो बिस्तर पर थे तो वीपी सिंह उनसे मिलने गए तो बमुश्किल बोलने की हालत में हो कर भी उनके मुख से यही निकला “वीपी अब किसानों का क्या होगा!”
जब पहली बार उत्तरप्रदेश के राजस्व व कृषि मंत्री बने तो एक जुलाई 1952 को जमींदारी प्रथा उन्मूलन कानून पास करवाया।1954 में उत्तरप्रदेश भूमि सरंक्षण कानून पास करवा कर किसानों की जमीन कोई हड़प न ले उसकी पुख्ता व्यवस्था की। सन् 1977 में चुनाव के बाद जब केंद्र में जनता पार्टी सत्ता में आई तो किंग मेकर जयप्रकाश नारायण के सहयोग से मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने और चरण सिंह को देश का गृहमंत्री बनाया गया।केंद्र सरकार में गृहमंत्री बने तो उन्होंने मंडल व अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना की।
श्री धीमसिंह व सुखरम पाल सिंह जी ने कहा की सन् 1979 में वित्तमंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में चोधरी साहब ने राष्ट्रीय कृषि व ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की स्थापना की। बाद में मोरारजी देसाई और चरण सिंह के बीच मतभेद बढ़ गए और देसाई ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने अपने स्मरण को याद कर कहा कि एक बार मेरठ में सुबह 5 बजे कश्मीर के वर्तमान राज्यपाल सतपाल मलिक गाड़ी चला रहे थे और चौधरी चरणसिंह साथ मे बैठे थे। शहर के बाहर कुछ महिलाएं सड़क किनारे शौच के लिए खड़ी थी तब चौधरी साहब ने कहा था कि सतपाल मेरे मन मे यह मलाल सदा रहता है कि मैं इन महिलाओं के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं कर पाया! न यूपी में मुख्यमंत्री रहने का लंबा अवसर मिला और न प्रधानमंत्री रहने का!अगर चौधरी चरणसिंह 10 साल यूपी के सीएम रह जाते तो आज यूपी तमाम राज्यों का रोल मॉडल होता और अगर 10 साल प्रधानमंत्री रह जाते तो आज देश जाति-धर्म की लड़ाई के बजाय शिक्षा/चिकित्सा /बेरोजगारी को लेकर वाद-विवाद करता नजर आता!
चौधरी साहब 3 अप्रैल, 1967 में पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे, तब उनकी निर्णायक प्रशासनिक क्षमता की धमक और जनता का उन पर भरोसा ही था कि सन् 1967 में पूरे देश दंगे होने के बावजूद उत्तर प्रदेश में कहीं पत्ता भी नहीं हिला।वर्तमान जातिय व धार्मिक दंगों का इलाज तत्कालीन समय मे वो महापुरूष बन कर खड़ा था। 17 अप्रैल, 1968 को उन्होंने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। मध्यावधि चुनाव में उन्होंने अच्छी सफलता मिली और दुबारा 17 फरवरी, 1970 को वह मुख्यमंत्री बने। उन्होंने अपने सिद्धांतों व मर्यादित आचरण से कभी समझौता नहीं किया।
इस अवसर पर यज्ञ के यज्ञमान श्री मनवीर सिंह सिरोह/ श्रीमति रजनी राठी रहे।
इस अवसर पर श्री निरंकार सिंह, ऋषि पाल सिंह, नरेन्द्र देशवाल, सिकन्दर सिंह, वेद प्रकाश , सोहनबीर राठी, राम लाल, जसवीर सिंह, जितेन्द्र सिंह, सतनाम सिंह सिद्धू, शक्ति सिंह, रकम सिंह, रविन्द्र कुमार, के पी सिंह, सुग्रीव सिंह, रविन्द्र मालिक, मेनपाल सिंह, आई पी एस तोमर, सुरेन्द्र सिंह , शिवचरण सिंह, उमेश कुमार, यशपाल मलिक, महक सिंह, हरपाल सिंह, ओमबीर सिंह, योगेन्द्र सिंह पुनिया, देवेन्द्र सिंह कुंडू, सी पी सिंह, जसवंत सिंह, बहादुर सिंह, राकेश सिंह, रणधीर सिंह, कुलबीर सिंह, प्रभात कौशिक, मुख्तयार सिंह, कुशल वीर सिंह, प्रदीप चौधरी, धूम सिंह, कवींद्र काकरान, सुखरम पाल सिंह, जगपाल सिंह, राजकुमार नैन, जितेन्द्र राठी, कृष्णा देवी,निर्मला देवी, रजनी राठी, मनवीर सिंह सिरोही, एडवोकेट सतीश चौधरी, एडवोकेट शिवा चौधरी आदि आदि सम्मिलित रहें।








