.हरिद्वार। 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तपिश राजनीतिक हलकों में साफ तौर पर महसूस देने लगी है। जनपद की हॉट सीट माने जाने वाली हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा सीट से जहां एक और भाजपा के टिकट पर स्वामी यतिस्वरानंद का चुनाव लड़ना माना जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस में हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा सीट से टिकट मांगने वाले दावेदारों की लंबी फेहरिस्त नजर आ रही है। परंतु मुस्लिम बाहुल्य माने जाने वाली इस विधानसभा सीट से दावेदारी कर रहे कांग्रेस के जमीनी नेताओं को पिछली बार की तरह एक बार फिर मायूसी झेलनी पड़ सकती है। 2017 विधानसभा चुनाव में तमाम दावेदारों को दरकिनार कर तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया था परंतु हरीश रावत को चुनाव में हार का स्वाद चखना पड़ा था। अब 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत ने एक बार फिर तमाम शंकाओं आशंकाओं को विराम देते हुए शुक्रवार को हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा सीट से दावेदारी ठोकते हुए अपना आवेदन हरिद्वार ग्रामीण के जिला अध्यक्ष धर्मपाल सिंह को सौंप कर अन्य दावेदारों में खलबली पैदा कर दी है। इस पर अनुपमा रावत द्वारा दावेदारी किए जाने से जहां एक और जमीन से जुड़े कांग्रेस नेताओं को एक बार फिर मन मसोसकर रहना पड़ेगा तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में बगावत का अंदेशा भी लगाया जा रहा है। जिसके चलते अनुपमा रावत को टिकट होने के बावजूद उनका इस विधानसभा सीट से जीत दर्ज करना मुश्किल साबित होगा। यही नहीं जिस प्रकार बसपा ने भी इस विधानसभा सीट से मुस्लिम प्रत्याशी उतारने को लेकर अपने इरादे साफ करते हुए गैर मुस्लिम प्रत्याशी उतारा है उससे पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी रहे मुकर्रम अंसारी और जयंत चौहान जैसे बसपा नेताओं द्वारा भी इस बार कोई बड़ा कदम उठाए जाने की शंका व्यक्त की जा रही है।