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हरिद्वार: चेक बाउंस मामले में आरोपी वसीम आज़म बरी, अदालत ने साक्ष्य अपर्याप्त पाया..

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रिपोर्टर बबलू खान

हरिद्वार/उत्तराखंड। वाद संख्या 639/2024, धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 से जुड़े एक प्रकरण में माननीय न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/द्वितीय अपर सिविल जज (एस.डी.), हरिद्वार ने आरोपी वसीम आज़म को दिनांक 19 फरवरी 2026 को पारित निर्णय के माध्यम से दोषमुक्त कर दिया।

 

न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि परिवादी पक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। संपूर्ण अभिलेखों और गवाहों के परीक्षण के उपरांत अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अभियोजन का मामला प्रमाणिकता की कसौटी पर खरा नहीं उतरता, जिसके चलते आरोपी को लगाए गए सभी आरोपों से पूर्णतः बरी किया जाता है।

 

अभियुक्त की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता हिमांक गुप्ता ने बताया कि न्यायालय ने तथ्यों एवं साक्ष्यों का निष्पक्ष परीक्षण करते हुए यह स्पष्ट पाया कि शिकायतकर्ता अपने दावे को विधि सम्मत तरीके से सिद्ध नहीं कर सका। उन्होंने इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को लंबे समय से चल रहे मामले में अंततः राहत मिली है।

 

  1. उल्लेखनीय है कि धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम से संबंधित मामलों में दोष सिद्ध करने के लिए शिकायतकर्ता को वित्तीय लेनदेन और चेक जारी होने के तथ्य को प्रमाणित करना आवश्यक होता है। इस मामले में ऐसा न हो पाने के कारण अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

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