
विकासनगर। बहुउद्देशीय किसान सेवा सहकारी समिति लिमिटेड, विकासनगर के ग्रामीण बचत केंद्र (मिनी बैंक) में करीब 3.43 करोड़ रुपये के गबन, कूटरचना और अभिलेखों में हेराफेरी के मामले में अदालत ने महिला कर्मचारी भारती देवी को दोषी करार दिया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, विकासनगर अभिषेक कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने अभियुक्ता को विभिन्न धाराओं में कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए कुल एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अभियोजन के अनुसार भारती देवी बहुउद्देशीय किसान सेवा सहकारी समिति लिमिटेड के ग्रामीण बचत केंद्र में सहायक आंकिक/प्रभारी के पद पर कार्यरत थीं। आरोप था कि *1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2020 के बीच उन्होंने समिति और जनता की कुल 3,43,85,671 रुपये** की धनराशि का गबन किया। इस दौरान आहरण पत्रों में कूटरचना करने के साथ ही लेखा-अभिलेखों में भी हेराफेरी किए जाने की बात सामने आई थी।
मामला सामने आने के बाद निबंधक, सहकारी समितियां, उत्तराखंड के आदेश के अनुपालन में थाना विकासनगर में मु0अ0सं0 364/2020 दर्ज किया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर फौजदारी वाद संख्या 521/2021 में सुनवाई हुई।
26 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपों को साबित करने के लिए कुल 26 गवाहों के बयान न्यायालय के समक्ष दर्ज कराए। इसके साथ ही बड़ी संख्या में दस्तावेजी साक्ष्य भी पेश किए गए। अभियोजन पक्ष के अनुसार मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों और गवाहों के बयानों से गबन तथा अभिलेखों में हेराफेरी के आरोपों की पुष्टि हुई।
मामले में विधि विज्ञान प्रयोगशाला, उत्तराखंड की हस्तलेख विशेषज्ञ रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण साक्ष्य रही। रिपोर्ट में अभिलेखों पर किए गए हस्ताक्षरों और कूटरचना से संबंधित तथ्यों की पुष्टि हुई, जिसके आधार पर अभियोजन ने अभियुक्ता के विरुद्ध अपना पक्ष मजबूत किया।
इन धाराओं में हुई सजा
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 409 में सात वर्ष का कठोर कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 420 में तीन वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 467 में सात वर्ष का कठोर कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 468 में सात वर्ष का कठोर कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
इसके अलावा धारा 471 में दो वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 477-क में सात वर्ष का कठोर कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। अदालत ने सभी सजाओं को साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है। इस कारण अभियुक्ता को अधिकतम सात वर्ष का कठोर कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने अभियुक्ता को धारा 428 दंड प्रक्रिया संहिता का लाभ भी अनुमन्य किया है।
अभियोजन ने साक्ष्यों के आधार पर साबित किया मामला
मामले में राज्य की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी विशाल गौड़ ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्ता के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित किया। न्यायालय के फैसले के बाद सहकारी समिति में हुई करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता के इस मामले में अभियुक्ता को सजा सुनाई गई।






